छत्तीसगढ़ के सनसनीखेज डीएमएफ घोटाले में क्या पूर्व मुख्यमंत्री और सीनियर कांग्रेस लीडर भूपेश बघेल भी चपेट में आएँगे? यह सवाल राजधानी रायपुर में तेजी से गूँज रहा है.
एक दिन पहले ही एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्ल्यू ने इस मामले में विशेष अदालत में दाखिल चार्जशीट में सस्पेंडेड आईएएस अधिकारी रानू साहू सहित सौम्या चौरसिया और कुल नौ लोगों की कारगुजारी का बड़ा दावा किया है।
एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ने विशेष अदालत में दाखिल छह हजार पन्नों की चार्जशीट में इन सभी नौ आरोपियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
चौरसिया कांग्रेस सरकार के समय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव थीं और तब उन्हें छत्तीसगढ़ में ‘सुपर सीएम’ कहा जाता था।
साहू भी इस मामले का बड़ा चेहरा रहीं और इसके चलते ही इस आईएएस अफसर को निलंबित कर दिया गया था।
चार्जशीट में यह भी कहा गया कि इस घोटाले को संरक्षण देने के बदले में उस समय के कई नेता और अफसरों को 25 से लेकर 40 फीसदी कमीशन की भी बंदरबांट की गई थी। इस गोरखधंधे में राज्य को कम से कम 75 करोड़ रुपए का चूना लगाया गया।
यह गड़बड़ी कोरबा की जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) में आवंटित टेंडर की राशि में हेरफेर कर की गई।
अब यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या उस समय के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस सारी गड़बड़ी से अनजान थे? क्योंकि 75 करोड़ रुपए के वारे-न्यारे हो जाएं और सरकार को भनक तक न लगे, यह मुमकिन नहीं दिखता है. इसलिए हर नजर इस बात पर भी है कि यदि आरोपियों पर कानून का शिकंजा कसा तो क्या वो घोटाले के लिए कुछ ऐसे नाम भी उजागर कर देंगे, जो सभी को सकते में डाल सकते हैं?
(लोकदेश डेस्क। रायपुर)


