देश की जनगणना में जातिगत आधार को भी शामिल करने का नरेंद्र मोदी सरकार का फैसला फिलहाल हर तरफ प्रमुखता के साथ चर्चा में है.
मोदी मंत्रिमंडल की बुधवार (30 अप्रैल, 2025) को हुई बैठक में जातिगत जनगणना वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है.
इसे लेकर सियासत भी चल रही है. विपक्ष, खासकर कांग्रेस यह दावा कर रही है कि उसके नेता राहुल गांधी की लगातार मांग के आगे झुकते हुए मोदी को यह निर्णय लेना पड़ा है.
इसके बीच मध्यप्रदेश में कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मोदी के इस निर्णय को गेम चेंजर बताया है. हालाँकि इसका मतलब यह नहीं कि पटवारी ने इसे लेकर मोदी की तारीफ़ की हो.
दरअसल, पटवारी ने आज भोपाल में कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अडिग लड़ाई ने भारतीय जनता पार्टी सरकार को ये फैसला लेने पर मजबूर कर दिया और ये जनगणना राज्य में वंचितों को उनका हक दिलाने में गेमचेंजर साबित होगी।
पटवारी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि राहुल गांधी की अडिग लड़ाई ने भाजपा को एक बार फिर घुटने टेकने पर मजबूर किया और जातिगत जनगणना का निर्णय लेना पड़ा। यह गांधी का विजन है जो ओबीसी, दलित, आदिवासी समुदायों को उनका हक दिलाएगा। मध्यप्रदेश कांग्रेस उनके साथ है।
बता दें कि गांधी ने 2023-24 में संसद, रैलियों, सोशल मीडिया पर जातिगत जनगणना को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया। तेलंगाना मॉडल को सामने लाकर, 50 फीसदी आरक्षण सीमा हटाने की मांग उठाई।
सामाजिक समरसता का मार्ग होगा प्रशस्त- डॉ. मोहन यादव
इधर, केंद्र सरकार द्वारा आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने के निर्णय पर सरकार का आभार प्रकट करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि ये फैसला सामाजिक समरसता और समानता का मार्ग प्रशस्त करेगा।
डॉ यादव ने कल रात अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हुई बैठक में आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय अभिनंदनीय है।
(लोकदेश डेस्क। भोपाल)


