Monday, January 19, 2026
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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में: कहीं दीप’क’ जले कहीं दिल

एक बड़ा मशहूर शेर है, ‘खत कबूतर किस तरह पहुंचाए बामे-यार पर? पर कतरने को लगी हैं कैंचियां दीवार पर.’ तो साहब मामला खत का है. कबूतर जैसा भी है और कैंचियों की धार कुछ कमजोर हो जाने वाला भी है. 

छत्तीसगढ़ में बीते कई दिन से कहा जा रहा था कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज की उम्मीदों का दीपक अब कभी भी बुझ सकता है. यानी वे किसी भी समय प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जा सकते हैं. दीपक को लेकर ये संकेत मिले तो कई दिलों में उम्मीदों के चिराग जगमगाने लगे. 

प्रदेश अध्यक्ष बनने के फेर में कई नेताओं ने राज्य से लेकर दिल्ली तक में लॉबिंग कर ली.  कहते हैं कि दो पूर्व कैबिनेट मंत्री, शिवकुमार डहरिया और अमरजीत भगत  तो  अध्यक्ष के रूप में अपनी-अपनी लॉबिंग के लिए दिल्ली दरबार की परिक्रमा भी कर चुके हैं. दोनों का कहना है कि  चूंकि वे आदिवासी हैं, लिहाजा उन्हें अध्यक्ष बनाया जाए. 

इधर एक और खेमा सक्रिय हुआ. उसने दावा किया कि इस पद के असली और सही दावेदार तो पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ही हैं. 

अटकलों के इस शोरगुल के बीच बैज चुप ही रहे. मगर बीते दिनों वरिष्ठ नेता चरणदास महंत ने कह दिया कि वो प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में नहीं हैं. इससे फिर लगा कि अब तक कुछ बड़ा बदलाव होने ही वाला है. 

मगर एक खत आया और लगता है कि दीपक बैज के ऊपर से खतरा टल गया है. क्योंकि बैज को यह खत सीनियर कांग्रेस लीडर और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने भेजा है. खबर है कि चिट्ठी में  बैज के कामकाज की सराहना की गयी है. 

राहुल ने न सिर्फ राज्य में महिलाओं  की हिफाजत के लिए बैज के आंदोलन की तारीफ की बल्कि  संगठन के लिए उनकी सक्रियता को सराहा भी है. 

तो अब इस चिट्ठी से वो नेता खुद को चित्त महसूस कर रहे होंगे, जो बैज की जगह पाने के लिए बीते लंबे समय से कुलबुला रहे थे. वैसे यदि इस खत को बैज के लिए संजीवनी मान लें तो सवाल यह कि फिर राज्य में कांग्रेस की मूर्छित अवस्था का क्या होगा? क्योंकि  बैज के अध्यक्ष  रहते हुए पार्टी की शान में चार चाँद तो नहीं लगे, उलटे हुआ यह कि पार्टी यहां  चार चुनावों में हार गयी. इनमें, विधानसभा, लोकसभा, रायपुर दक्षिण उपचुनाव और नगरीय निकाय चुनाव शामिल हैं. इस लिहाज से परिवर्तन की मांग और जोर पकड़ रही थी. 

इसलिए राहुल के खत में कबूतर वाली बात यह कि इससे प्रदेश कांग्रेस में अध्यक्ष पद के लिए दावेदार नेताओं को फिलहाल शांति रखने का पैगाम भी दे दिया गया है

खैर, फ़िलहाल तो यही लगता है कि सारा मामला टांय टांय फिस्स हो गया है और राज्य कांग्रेस में कहीं दीपक जले कहीं दिल वाली स्थिति बन गयी है. यह बात और कि दीपक खुशी ले लपलपाता दिखता है और जलते हुए  दिलों को सुलगन का शिकार ही कहा जा सकता है

(लोकदेश के लिए रत्नाकर त्रिपाठी की रिपोर्ट)