छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार के मंत्री रहे कवासी लखमा (देखें छायाचित्र) खुद जेल में हैं और उनके चलते पार्टी को भी फजीहत का सामना करना पड़ गया है। क्योंकि आरोप तो यह भी है कि लखमा ने जिस शराब घोटाले में करोड़ों का हेरफेर किया, उसी घोटाले के पैसे से राज्य में कांग्रेस का एक दफ्तर भी तान दिया गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार के दौरान हुए सनसनीखेज 2,100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित शराब घोटाले से जुड़ी धनशोधन के मामले की जांच के सिलसिले में राज्य में कांग्रेस पार्टी के एक कार्यालय के अलावा उसके विधायक कवासी लखमा की कुल 6.15 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है।
आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि इन संपत्तियों को कुर्क करने का अनंतिम आदेश धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि कुर्क की गई संपत्तियों में लखमा, उनके बेटे हरीश लखमा और सुकमा जिले में कांग्रेस कार्यालय भवन की संपत्तियां शामिल हैं।
संघीय एजेंसी ने दिसंबर 2024 में रायपुर, सुकमा और धमतरी जिलों में लखमा से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की थी। कवासी लखमा को ईडी ने गिरफ्तार भी किया था। लखमा (72) कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में आबकारी मंत्री रह चुके हैं। हरीश लखमा सुकमा में पंचायत अध्यक्ष हैं।
दारू के पैसे से ही बनाया पार्टी का दफ्तर !
प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि छत्तीसगढ़ शराब ‘‘घोटाले’’ के परिणामस्वरूप राज्य के कोष को ‘‘भारी नुकसान’’ हुआ और शराब सिंडिकेट के लाभार्थियों ने इस अपराध से 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध आय अर्जित की। इसमें आरोप लगाया गया है कि अवैध शराब व्यापार से अर्जित आय का उपयोग सुकमा में कांग्रेस कार्यालय बनाने में किया गया
(लोकदेश संवाददाता/एजेंसी। रायपुर)


