बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल 2022, एशिया कप 2022 में कांस्य, एशियाई चैम्पियंस ट्रॉफी 2023 और 2024 में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहना अपने आप में काफी बड़ी उपलब्धियां हैं. लेकिन यदि हॉकी के गोल से भी बड़ा गोल आपको अपनी तरफ खींचता रहे तो फिर खेल के मैदान से जिंदगी के और भी कड़े इम्तेहान वाले मैदान तक का रास्ता बहुत अधिक मुश्किल नजर नहीं आता है.
ऐसा ही है, भारतीय महिला हॉकी टीम की शान ज्योति रूमावत का संकल्प। स्टार डिफेंडर ज्योति ने हॉकी के लिए बहुत मेहनत और समय देने के बीच भी भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में जाने के अपने सपने को थकने नहीं दिया है.
संवाद एजेंसी पीटीआई भाषा के लिए मोना पार्थसारथी से चर्चा में ज्योति ने कहा, ‘‘‘ मैं हॉकी नहीं खेलना चाहती थी। मैं पढ़ाई करके आईपीएस बनना चाहती थी। अभी भी यह सपना मेरे मन में है कि पढ़ाई पूरी करके एक दिन आईपीएस बनूं।’’
हरियाणा के सोनीपत की इस खिलाड़ी का कहना है कि वह एक बार यूपीएससी का इम्तिहान जरूर देंगी ।
बचपन में ही अपने पिता को खो चुकी ज्योति का सफर आसान नहीं रहा और एक समय ऐसा भी था जब उनकी मां के पास उनकी स्कूल की फीस भरने तक के पैसे नहीं थे। लेकिन चुनौतियों को ही अपनी ताकत बनाकर ज्योति ने सफलता की सीढ़ियां चढ़ी।
फिलहाल एशियाई खेलों और अगले साल होने वाले विश्व कप पर फोकस कर रही ज्योति ने कहा,‘‘ जब मैं हॉकी खेलना छोडूंगी तो एक बार ट्राय जरूर करूंगी कि यूपीएससी की परीक्षा दूं ।’’ ज्योति ने बताया कि अपनी मैं मां के आग्रह पर ही उन्होंने आईपीएस की तैयारी छोड़कर हॉकी के मैदान का रुख किया।
उन्होंने बताया ,‘‘ मैं पढ़ाई में बहुत अच्छी थी और मेरा बिल्कुल मन नहीं था खेलने का। कोच प्रीतम सिवाच (भारत की पूर्व खिलाड़ी) ने मेरी मां से मुझे हॉकी खेलने भेजने के लिये कहा और जब मैंने खेलना शुरू किया तो हॉकी में मन रम गया।’’
यह पूछने पर कि यूपीएससी की तैयारी के लिये समय मिलता है, ज्योति ने कहा ,‘‘ हमारा शेड्यूल बहुत टाइट होता है। शनिवार और रविवार को ही मौका मिलता है और मैं कोशिश करती हूं कि रोज अखबार पढूं ताकि अपडेट रहूं।’’
एक निजी यूनिवर्सिटी के ऑनलाइन कोर्स में एमबीए में दाखिला लेने वाली ज्योति ने बताया,‘‘ मैंने बीए के पांच सेमिस्टर पूरे कर लिये थे लेकिन नौकरी मिलने पर छोड़ना पड़ा। अभी आईओसी में मार्केटिंग डिविजन में हूं और एमबीए में दाखिला लिया ताकि भविष्य में काम आये ।’’
उन्होंने कहा कि फिलहाल तो पूरा फोकस हॉकी पर है और विश्व कप में पदक जीतना सपना है जिसके लिये कोच हरेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में वह पूरी मेहनत कर रही हैं ।
भारत की पूर्व कप्तान रानी रामपाल को आदर्श मानने वाली ज्योति की मां अब नहीं हैं लेकिन उन्हें खुशी है कि मां ने उन्हें भारत के लिये खेलते देखा।
वायु सेना में कार्यरत अपने भाई, भाभी और दादी के साथ रहने वाली इस खिलाड़ी ने कहा,‘‘ मेरी मां ने मुझे देश के लिये खेलते देखा। उनकी कमी तो खलती है लेकिन मैंने उसी को अपनी प्रेरणा और ताकत बना लिया है।’’


