देश के खेल जगत में 15 साल के अंतराल से एक बड़ा बदलाव होने के पूरे आसार हैं. इसमें अपनी उम्र को लेकर झूठ बोलने वाले खिलाड़ियों के खिलाफ सख्त दंड की व्यवस्था शामिल की जा सकती है.
दरअसल खेल मंत्रालय ने खेलों में उम्र संबंधी धोखाधड़ी के खिलाफ राष्ट्रीय संहिता (एनसीएएएफएस) 2025 के मसौदे को अंतिम रूप दे दिया है. इसे अगले सप्ताह मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट को भेजे जाने की तैयारी है.
इसमें आयु धोखाधड़ी उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के प्रावधान के साथ खिलाड़ियों की सही उम्र का पता लगाने के लिए एआई-आधारित हड्डी आंकलन की बात कही गई है।
खेल मंत्रालय ने इस साल मार्च में एनसीएएएफएस को सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए ऑनलाइन पोस्ट किया गया था
भारतीय खेलों में युवा और जूनियर स्तर पर आयु धोखाधड़ी एक बड़ी समस्या रही है, जहां चिकित्सा जांच के प्रावधानों के बावजूद अक्सर अधिक आयु के एथलीट प्रतिस्पर्धा करते हुए पकड़े जाते हैं।
संशोधित संहिता के अनुसार सभी इच्छुक और पंजीकृत खिलाड़ियों को आयु सत्यापन के लिए तीन अनिवार्य दस्तावेज जमा करने होंगे। इसमें जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड/मतदाता पहचान पत्र/पासपोर्ट/पैन कार्ड और स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र/मैट्रिकुलेशन प्रमाण पत्र शामिल है।
इसके बाद दस्तावेज़ सत्यापन भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) और राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) द्वारा किया जाएगा। मंत्रालय अब तक आयु धोखाधड़ी की घटनाओं का रिकॉर्ड नहीं रखता रहा है। इस तरह के मामलों के लिए अब तक 2010 की एनसीएएएफएस की मदद ली जाती थी लेकिन इसमें उल्लंघन करने वालों के लिए सजा का प्रावधान नहीं था। संशोधित संहिता में पहली बार अपराध करने वाले एथलीटों के लिए दो साल के प्रतिबंध की सिफारिश की गई है।
दूसरी बार उल्लंघन करने पर आजीवन प्रतिबंध लगेगा और ‘भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी।’
संहिता में कहा गया है, ‘‘सभी मौजूदा पंजीकृत एथलीट दस्तावेज को साइ या एनएसएफ को अनिवार्य तौर पर जमा करेंगे। ऐसे मामलों में जहां कोई दस्तावेज गुम हो गया हो या दस्तावेजों की प्रामाणिकता के बारे में संदेह है, खिलाड़ियों को मेडिकल जांच के लिए भेजा जाएगा।’’
आयु सत्यापन के बाद, एथलीट की आयु एक समर्पित डेटाबेस में स्थायी रूप से दर्ज की जाएगी। यह रिकॉर्ड अपरिवर्तनीय रहेगा और एथलीट के पूरे खेल करियर के दौरान आयु के निश्चित प्रमाण के रूप में काम करेगा।
संहिता में एक बार की माफी योजना का प्रावधान है, जो मौजूदा एथलीटों को नीति लागू होने के छह महीने के भीतर अपनी सही आयु साइ या संबंधित एनएसएफ को स्व-घोषित करने की अनुमति देगा। आयु को मेडिकल जांच के माध्यम से संबोधित किया जाएगा।
(लोकदेश डेस्क/एजेंसी। नई दिल्ली)


