Thursday, January 15, 2026
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राजा रघुवंशी के जीवन की  वह जोंक और हम सरीखों के लिए बाजार का ये जोक 

हो  सकता है कि ये सोच रूढ़िवादी लगे. मेरा एक दोस्त नरेश नालिया अब इस दुनिया में नहीं है. एक समय वो विवाह प्रस्ताव के सिलसिले में एक घर गया. नरेश के परिवार सहित लड़की के परिजन भी खुश थे कि संबंध हो ही गया है. 

लेकिन ऐसा नहीं हुआ…… उस रात भोपाल के बिट्टन मार्केट में नरेश ने मुझे बताया कि उस युवती के हावभाव देखकर ही वो समझ गया था कि इस संबंध के लिए वो इच्छुक नहीं थी. नरेश ने उससे अलग से बात की. युवती ने कहा कि वो किसी और को चाहती है. नरेश उसे घर छोड़कर आया. उनके परिवार वालों से निवेदन किया ‘ये जहां खुश हैं, वहां इनकी शादी कर दीजिए’ 

उस रात नरेश दुखी था, लेकिन उसे संतोष था कि उसने किसी को विवश नहीं किया। 

सवाल यह कि अभागा राजा रघुवंशी शादी की रस्म करते समय ये क्यों नहीं भांप पाया कि उसकी होने जा रही पत्नी किसी मुर्दा चेहरे के साथ वो रस्म निभा रही है? 

 वो वीडियो देखकर तो बच्चा भी कह देगा कि ये एकतरफा जूनून था और दूसरी तरफ कुछ और ही था.

मन भर आता है वो वीडियो देख कर जिनमें राजा अपने परिवार के सदस्यों के कैमरे के  सामने आने के बाद अंत में कहते हैं कि वो खुद दूल्हा हैं. 

जो लोग गणित दे रहे हैं कि शादी से पहले सब जांच कर लें, वो खुद बता दें कि राजा के उल्लास की जगह वो होते तो क्या जांच-पड़ताल के लिए बैठ जाते? 

राजा नहीं मरा, बल्कि वो इंटरनेट और ओटीटी प्लेटफॉर्म और जिंदगी पाकर भस्मासुर बन गया, जो सिर्फ अपनी आर्थिक उपलब्धि के लिए हमें ये सिखाता है कि हर कोई अपनी पसंद के लिए स्वछन्द है। क्योंकि फिल्म ‘हनीमून ट्रेवल्स’ तो यह भी सिखाती है कि ब्याहता का अपने पति को गोली मारने की धमकी देकर प्रेमी के साथ भाग जाना बहुत आदर्श काम है और यह भी कि किसी पति का अपनी पत्नी को छोड़ समलैंगिक होना भी ‘आधुनिकता’ का पर्याय ही है. 

इस सबको ट्रेंड का खोखला चोला ओढ़ा दिया जाता है. क्योंकि आमिर खान तीसरी बीवी को भी तलाक देते हैं तो बीबीसी उनकी तारीफ में लिखता है कि इस दंपति ने एक ‘टैबू’ तोड़ने का क्रांतिकारी कदम उठाया है. बीबीसी का सन्देश यह कि ‘लात मारो शादीशुदा संबध को भी, जब हम भारत के नक़्शे से कश्मीर को अलग कर सकते हैं तो फिर आप अपनी मान्यताओं को क्यों नहीं लात मार पाते हैं? ‘ 

आपको पता है कि स्वच्छंदता का खोखला संदेश देने वाले जब आख़िरी सांस गिनते हैं. तब खुद इनके पास पानी पिलाने वाला भी कोई  नहीं होता है? फिर भी वो महान हैं और उनका ये सच आपको नहीं बताया जाएगा, क्योंकि ओटीटीपी की गलीज दाल-रोटी जो चलनी है.  

तो बीबीसी के टैबू के फेर में रहिए। बाजार तो है ही कि आपको प्री वेडिंग शूट में सब कुछ नजरअंदाज कर के खुश दिखना ही है. मुझे यकीन है कि नरेश नालिया ने उस रात मुझे जो बताया, यदि उसने किसी कैमरे के सामने वह कह दिया होता तो वो बदनाम कर  दिया जाता। क्योंकि ये नितांत निजी स्वार्थ में लिपटी हुई तमाम जहरीली जोंक का समय है और हम इसके जोक बनने के लिए सबसे अधिक मुफीद हैं. 

(लोकदेश के लिए रत्नाकर त्रिपाठी)