Monday, January 19, 2026
Google search engineGoogle search engine
Homeदेश43 साल जेल में काटे, तब कहीं जाकर 103 की उम्र में...

43 साल जेल में काटे, तब कहीं जाकर 103 की उम्र में बाइज्जत बरी किए गए लखन 

एक शेअर है, ‘असीराने-क़फ़स में नई ईजाद करते हैं. रही ताकत न उड़ने की तो वो आज़ाद करते हैं’ 

कुछ ऐसा ही हुआ है एक शख्स के साथ, जिसे 103 साल की उम्र में क़फ़स यानी कैदखाने से आजादी मिली, वो भी 43 साल के लगातार संघर्ष के बाद. 

मामला उत्तरप्रदेश के कौशांबी का है, जहां हत्या और हत्या के प्रयास के आरोप में जिला जेल में बंद 103 वर्षीय लखन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पैरवी पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश से 43 साल बाद जेल से रिहा हो गए हैं।

कौशांबी जिला जेल में बंद लखन कौशांबी थाना क्षेत्र के गौराए गांव के निवासी हैं और उन्हें 1977 में हत्या एवं हत्या के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। 

इसके बाद 1982 तक उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी, लेकिन उन्हें जनपद एवं सत्र न्यायालय प्रयागराज ने आजीवन कारावास की सजा सुना दी।

अपर जिला जज और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कौशांबी की सचिव पूर्णिमा प्रांजल ने बताया, “अदालत के आदेश के बाद जिला जेल अधीक्षक के सहयोग से लखन को मंगलवार को कौशांबी जिला जेल से रिहा किया गया।”  

उन्होंने बताया कि लखन ने निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील की और उनकी अपील पर 43 साल बाद उनके हक में फैसला आया और दो मई, 2025 को उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। 

उन्होंने बताया कि लखन को शरीरा पुलिस थाना अंतर्गत उसकी बेटी के घर सुरक्षित पहुंचाया गया जहां वर्तमान में वह रह रहे हैं।

(लोकदेश डेस्क/एजेंसी। कौशांबी)