मल्लिका साराभाई की पहचान एक उम्दा नृत्यांगना के रूप में है. उन्होंने सई परांजपे की साल 1983 में रिलीज हुई फिल्म ‘कथा’ में अपनी अभिनय क्षमता का भी परिचय दिया
अब मल्लिका की नई पहचान दक्षिण भारत में केरल कलामंडलम की चांसलर के रूप में है. यह डीम्ड यूनिवर्सिटी केरल के चेरुतुरति में स्थित है. और इसकी चांसलर ने किसी का नाम लिए बगैर ‘अपनी आवाज दबाए जाने’ का आरोप लगा दिया है.
मल्लिका ने भले ही खुलकर बात नहीं की, लेकिन सोशल मीडिया पर उन्होंने जो लिखा, वह केरल में पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार की तरफ इशारा कर रहा है.
दरअसल साराभाई हाल ही में इस राज्य में सरकार से संघर्ष कर रहीं आशा कार्यकर्ताओं के एक आंदोलन का खुलकर समर्थन किया था.
आशा कार्यकर्ता बीते दो महीने से भी अधिक समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रही हैं. सरकार से उनकी सुलह वार्ताएं असफल ही रही हैं.
कुछ समय पहले साराभाई ने इन कार्यकर्ताओं का समर्थन करते हुए लिखा था, ‘महिलाएं (आशा) बहुत महत्वपूर्ण काम करती हैं लेकिन उन्हें बहुत कम वेतन मिलता है और उनका शोषण होता है’
अब मल्लिका ने सोशल मीडिया पर शिकायती अंदाज में लिखा है, ‘चांसलर बनने के बाद मुझे खुलकर बोलने की आजादी नहीं है। आज मुझे समझ आया कि विश्वविद्यालय की चांसलर होना क्या होता है। अब मुझे समझ आ रहा है कि अब मुझे खुलकर बोलना मना है। बोलने पर प्रतिबंध।’
साराभाई ने यह भी लिखा कि नई शैक्षणिक भूमिका में उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित कर दिया गया है।
बता दें कि मल्लिका साराभाई को 6 दिसंबर 2022 को केरल कलामंडलम (कला एवं संस्कृति के लिए मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय) का चांसलर नियुक्त किया गया था।
मूल रूप से रहने वाली मल्लिका साराभाई ने हालांकि यह खुलासा नहीं किया कि उन पर न बोलने के लिए किसकी तरफ से दबाव बनाया जा रहा है. उन्होंने इस मामले का अधिक खुलासा करने से भी खुद को दूर रखा है.
(लोकदेश डेस्क/एजेंसी। तिरुवनंतपुरम)


