“कभी नक्सल हिंसा का पर्याय रहा बस्तर क्षेत्र अब विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभर रहा है। वहां के जो बच्चे कभी जंगलों में जलाऊ लकड़ी इकट्ठा करते थे, वे आज मशीनें चलाना और लैपटॉप चलाना सीख रहे हैं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में यह बात छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कही. साय ने इसके साथ ही छत्तीसगढ़ को 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बनाने की दूरदर्शी योजना पेश की।
साय नई दिल्ली में नीति आयोग की 10वीं शासी परिषद की बैठक में बोल रहे थे. एक आधिकारिक बयान के अनुसार साय के इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को 3टी मॉडल: प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और परिवर्तन के जरिए हासिल किया जाएगा।
साय ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस योजना का उद्देश्य राज्य की प्रति व्यक्ति आय को दस गुना बढ़ाना है और उनकी सरकार ने अगले पांच वर्षों में राज्य के जीएसडीपी को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।
इस दीर्घकालिक विकास एजेंडे के तहत सरकार ने आर्थिक वृद्धि, सामाजिक प्रगति और पर्यावरणीय स्थिरता पर जोर दिया है।
उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन एक अधिक तकनीक आधारित, पारदर्शी और कुशल प्रणाली को अपना रहा है, जिसमें नागरिकों को समय पर और प्रभावी ढंग से सेवा देने के लिए हर सरकारी योजना की डिजिटल रूप से निगरानी की जा रही है।
राज्य ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचा, कृषि, आईटी, पर्यटन और कौशल विकास सहित 13 प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। इन क्षेत्रों में प्रभावी कार्यान्वयन के लिए दस केंद्रित मिशन शुरू किए गए हैं।
साय ने बस्तर के बदलाव पर जोर देते हुए कहा कि यह अब अवसरों से भरा हुआ क्षेत्र बनकर उभर रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर और आसपास के 32 ब्लॉक में कौशल विकास केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां स्थानीय युवा कंप्यूटर साक्षरता, स्वास्थ्य सेवा, खाद्य प्रसंस्करण और तकनीकी व्यापार जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं।
साय ने क्षेत्र में निवेश बढ़ने के बारे में भी बताया और कहा कि नवा रायपुर में देश की पहली सेमीकंडक्टर इकाई और एआई डेटा सेंटर की स्थापना से बस्तर और पूरे राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प लिया है।
(लोकदेश डेस्क/एजेंसी। नई दिल्ली)


