सनसनीखेज नीतीश कटारा हत्याकांड तो सभी को याद होगा। इस वारदात के एक दोषी सुखदेव यादव उर्फ़ पहलवान की याचिका ने देश-भर की जेलों में बंद ऐसे कैदियों की मुक्ति का रास्ता साफ़ कर दिया है, जो सजा की अवधि पूरी होने के बाद भी रिहा नहीं किए गए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे कैदियों की स्थिति पर मंगलवार को चिंता व्यक्त करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि अगर कोई दोषी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत रिहा किया जाए।
पीठ ने 2002 के नीतीश कटारा हत्याकांड में सुखदेव यादव उर्फ पहलवान की रिहाई का आदेश देते हुए यह निर्देश दिया।
पीठ ने कहा कि यादव ने इस साल मार्च में बिना किसी छूट के 20 साल की सजा पूरी कर ली है। पीठ ने कहा, ‘‘इस आदेश की प्रति रजिस्ट्री द्वारा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गृह सचिवों को भेजी जाए ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या कोई आरोपी या दोषी सजा की अवधि से अधिक समय तक जेल में है।’’
पीठ ने कहा, ‘‘अगर ऐसा है और दोषी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हो तो ऐसे कैदियों की रिहाई के निर्देश जारी करें। इसी तरह की एक प्रति राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव को भेजी जाए ताकि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विधिक सेवा प्राधिकरणों के सभी सदस्य सचिवों को प्रेषित की जा सके और निर्णय के कार्यान्वयन के लिए राज्यों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को सूचित किया जा सके।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि यादव को सजा पूरी करने के बाद रिहा किया जाना चाहिए था। पीठ ने कहा, ‘‘नौ मार्च, 2025 के बाद अपीलकर्ता को और अधिक कारावास में नहीं रखा जा सकता…। वास्तव में 10 मार्च, 2025 को अपीलकर्ता को अपनी सजा पूरी करने के बाद रिहा किया जाना चाहिए था।’’
शीर्ष अदालत ने इससे पहले यादव को तीन महीने की ‘फरलो’ दी थी और कहा कि उसने बिना किसी छूट के 20 साल की निर्बाध कैद काट ली है। फरलो जेल से एक अस्थायी रिहाई है, न कि पूरी सजा का निलंबन या छूट, जो आमतौर पर लंबी अवधि की सजा पाए ऐसे कैदियों को दी जाती है जिन्होंने अपनी सजा का एक हिस्सा पूरा कर लिया हो।
यादव की याचिका में दिल्ली उच्च न्यायालय के नवंबर 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने उसे तीन सप्ताह के लिए फरलो पर रिहा करने की उसकी याचिका खारिज कर दी थी। उच्चतम न्यायालय ने तीन अक्टूबर, 2016 को कटारा के सनसनीखेज अपहरण और हत्या में भूमिका के दोषी विकास यादव और उसके चचेरे भाई विशाल यादव को बिना किसी छूट के 25-25 साल की जेल की सजा सुनाई थी। मामले में सह-दोषी सुखदेव यादव को 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।
इसलिए ली थी नीतीश की जान
सुखदेव यादव को 16 और 17 फरवरी, 2002 की मध्यरात्रि को एक विवाह समारोह से कटारा का अपहरण करने और फिर विकास की बहन भारती यादव के साथ उसके कथित संबंध के कारण उसकी हत्या करने का दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई। भारती उत्तर प्रदेश के नेता डी. पी. यादव की बेटी हैं। अधीनस्थ अदालत ने पाया कि कटारा की हत्या इसलिए की गई क्योंकि विशाल और विकास यादव ने अलग जाति से होने के कारण भारती के साथ कटारा के संबंध को स्वीकार नहीं किया था।
(लोकदेश डेस्क/एजेंसी। नई दिल्ली)


