Tuesday, January 20, 2026
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इजरायल-ईरान: इस बड़े युद्ध से जुड़े मसले पर भारत की इस बड़ी खामोशी के क्या हैं अर्थ ? 

ईरान पर इजरायल के भीषण हमले के बाद भारत ने इस दिशा में एक कदम को लेकर अपनी चुप्पी से कई बड़े संकेत दे दिए हैं, ऐसा लगता है. 

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा में गाजा में ‘‘तत्काल, बिना शर्त और स्थायी’’ युद्धविराम की मांग वाले मसौदा प्रस्ताव पर मतदान से भारत ने परहेज किया है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्पेन द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर मतदान हुआ। 

इस प्रस्ताव में तत्काल, बिना शर्त तथा स्थायी युद्धविराम और हमास तथा अन्य समूहों द्वारा बंधक बनाए गए सभी लोगों की तत्काल तथा बिना शर्त रिहाई की मांग की गई।

भारत समेत 19 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया, जबकि 12 देशों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया और पक्ष में 149 वोट पड़े।‘

नागरिकों की सुरक्षा और कानूनी एवं मानवीय दायित्वों को कायम रखना’ शीर्षक वाले प्रस्ताव पर मतदान की व्याख्या में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि यह प्रस्ताव गाजा में बिगड़ती मानवीय स्थिति की पृष्ठभूमि में लाया गया है।

उन्होंने कहा कि भारत गहराते मानवीय संकट से बहुत चिंतित है और नागरिकों की मौत की घटना की निंदा करता है।हरीश ने कहा कि भारत पहले भी इजराइल-फलस्तीन मुद्दे पर प्रस्तावों से दूर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज मानना है कि संघर्षों को बातचीत और कूटनीति से ही हल किया जा सकता है। दोनों पक्षों को करीब लाने के लिए एक संयुक्त प्रयास किया जाना चाहिए। इन कारणों से हम इस प्रस्ताव पर मतदान से दूर रहेंगे।’’

प्रस्ताव में मांग की गई कि इजराइल तुरंत नाकाबंदी खत्म करे, सभी सीमा पार मार्ग खोले और यह सुनिश्चित करे कि अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के तहत दायित्वों के अनुरूप गाजा पट्टी में फलस्तीनी नागरिकों तक तुरंत और बड़े पैमाने पर सहायता पहुंचाई जाए।

(लोकदेश डेस्क/एजेंसी। संयुक्त राष्ट्र)