Sunday, January 18, 2026
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Homeबिजनेसमुनाफावसूली के वजन तले दबा बाजार, हर जगह ऐसे मचा हाहाकार 

मुनाफावसूली के वजन तले दबा बाजार, हर जगह ऐसे मचा हाहाकार 

मंगलवार को शेयर बाजार को लेकर भारी अमंगल वाले हालात बन गए हैं. 

भारत-पाक युद्धविराम से सीमा पर तनाव घटने से उत्साहित निवेशकों की दमदार लिवाली की बदौलत बीते दिवस तूफानी तेजी पर रहा घरेलू शेयर बाजार आज मुनाफावसूली के दबाव में ढेर हो गया।
बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 836.61 अंक का गोता लगाकर 82 हज़ार अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 81593.29 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 211.95 अंक की गिरावट लेकर 24712.75 अंक पर कारोबार कर रहा है।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 180 अंक टूटकर 82,249.60 अंक पर खुला और खबर लिखे जाने तक 82,572.81 अंक उच्चतम जबकि 81,468.82 अंक के निचले स्तर पर रहा। इसी तरह निफ्टी भी 61 अंक उतरकर 24,864.05 अंक पर खुला और 24,973.80 अंक के उच्चतम जबकि 24,675.60 अंक के निचले स्तर पर रहा।
विश्लेषकों के अनुसार, कल के कारोबारी सत्र में शेयर बाजार में जोरदार उछाल देखने को मिला, जहां निफ्टी ने 916 अंकों की छलांग लगाई। यह उछाल युद्धविराम की खबरों के बाद आई सकारात्मक भावना के चलते हुआ लेकिन इसका समर्थन संस्थागत निवेश से नहीं मिला। विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) और घरेलू संस्थानगत निवेशक (डीआईआई) की कुल शुद्ध खरीद महज 2,694 करोड़ रुपये रही, जिससे साफ है कि तेजी मुख्य रूप से शॉर्ट-कवरिंग और खुदरा एवं उच्च नेटवर्थ निवेशकों की खरीदारी के कारण हुई। यह स्थिति संकेत देती है कि यदि आगे भी संस्थागत निवेशक सक्रिय नहीं होते हैं तो इस तेजी की गति बनाए रखना कठिन हो सकता है। बाजार की दिशा अब इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या संस्थागत निवेश में मजबूती आती है या फिर यह हालिया तेजी अल्पकालिक ही साबित होती है।
दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन के बीच 90 दिनों के लिए टैरिफ घटाने का समझौता सकारात्मक संकेत दे रहा है। इससे व्यापार युद्ध के समाप्त होने की संभावना बढ़ी है, जो वैश्विक बाजारों को राहत पहुंचा सकती है। अमेरिका में मंदी की आशंका घटने से भारतीय आईटी कंपनियों को वहां की कंपनियों द्वारा बढ़े हुए प्रौद्योगिकी खर्च से लाभ हो सकता है।
वहीं, फार्मा क्षेत्र के लिए स्थिति थोड़ी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए दिए गए कार्यकारी आदेश से भारतीय फार्मा निर्यातकों को प्राइस प्रेशर का सामना करना पड़ सकता है, जिससे इन कंपनियों के स्टॉक्स पर नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।

(लोकदेश डेस्क/एजेंसी। मुंबई)