Tuesday, January 20, 2026
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महाराष्ट्र: एक हुए ठाकरे भाई तो भी इसलिए निश्चिन्त रहेंगे भाजपाई 

महाराष्ट्र में शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट (यूबीटी) और राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे यदि मिल जाती हैं, तब भी भारतीय जनता पार्टी की संभावनाओं को उनसे नुकसान पहुँचने की फिलहाल कोई संभावना नहीं दिखती है. एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है. 

ऐसा हम नहीं कह रहे. यह तो उस दावे की बात कर रहे हैं जो महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक पदाधिकारी ने आगामी मुंबई नगर निगम चुनावों के मद्देनजर कराए गए एक आंतरिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए किया है. 

उन्होंने कहा है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) और राज ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बीच गठबंधन होने पर भाजपा की चुनावी संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ने वाला।

भाजपा ने बृहन्मुंबई नगर निगम के साथ-साथ पुणे और ठाणे सहित अन्य प्रमुख नगर निकायों के चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है, जो इस साल के अंत में होने की संभावना है।

उद्धव ठाकरे के चचेरे भाई राज ठाकरे ने इस तरह के संकेत देने वाले बयान से दोनों के बीच संभावित सुलह की अटकलों को हवा दे दी है कि वे ‘‘छोटे-मोटे मुद्दों’’ को नजरअंदाज कर सकते हैं और लगभग दो दशक के कटुतापूर्ण मतभेद के बाद हाथ मिला सकते हैं।

मनसे ने 2024 के लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में भाजपा को समर्थन की पेशकश की थी लेकिन छह महीने बाद दोनों दलों ने राज्य विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा।

भाजपा के पदाधिकारी ने बुधवार को कहा, ‘‘ठाकरे भाइयों से संबंधित राजनीतिक घटनाक्रम के मद्देनजर भाजपा ने मुंबई के चुनावी परिदृश्य पर उद्धव-राज गठबंधन के संभावित प्रभाव का आकलन करने के लिए एक विस्तृत सर्वेक्षण कराया है।’’

उन्होंने कहा कि आंतरिक आकलन के निष्कर्षों के अनुसार, उनके संभावित गठबंधन से शहर में भाजपा की संभावनाओं को नुकसान पहुंचने के आसार नहीं हैं।

पदाधिकारी ने कहा कि सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि भाजपा तीन प्रमुख कारकों की वजह से मुंबई में मजबूत स्थिति में है: 

उन्होंने कहा कि  अपने पारंपरिक मतदाता आधार के चलते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नेतृत्व और पिछले राज्य विधानसभा चुनावों में पार्टी का बेहतरीन प्रदर्शन।

उन्होंने कहा, ‘‘यहां तक कि पारंपरिक मराठी मतदाता आधार वाले क्षेत्रों में भी भाजपा का समर्थन स्थिर बना हुआ है। 

सर्वेक्षण से पता चलता है कि ठाकरे भाइयों के बीच गठबंधन से पार्टी की सीट संख्या पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।’’पदाधिकारी ने कहा कि आकलन से यह भी संकेत मिलता है कि 2022 में शिवसेना में विभाजन के बाद मुंबई में उद्धव ठाकरे का प्रभाव कम हो गया है और पार्टी के लगभग आधे पार्षद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि इस बीच, राज ठाकरे का प्रभाव सीमित माना जाता है।

पदाधिकारी ने कहा कि अगर भाजपा बीएमसी चुनावों में (कुल 227 में से) 150 सीट पर चुनाव लड़ती है तो उसे फायदा होगा।उन्होंने कहा कि पार्टी की तैयारियां उसी के अनुसार की जा रही हैं।

(लोकदेश डेस्क/एजेंसी। मुंबई)