छत्तीसगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों की स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए जल्दी ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय युक्तियुक्तकरण के माध्यम से संतुलन की दिशा में बड़ा निर्णय ले सकते हैं। क्योंकि देहाती इलाकों में बसे सरकारी हायर सेकंडरी और हाई स्कूलों में शहरों के मुकाबले टीचिंग स्टाफ की भारी कमी हो गई है। कुछ जिलों से मिली इस रिपोर्ट के बाद अब इस दिशा में सरकार के स्तर से कोई महत्वपूर्ण पहल की जाने के पूरे आसार हैं।
हाल ही में आए शिक्षा सत्र 2024- 25 के परीक्षा परिणामों में ग्रामीण इलाकों का प्रदर्शन शहरों के मुकाबले काफी कमजोर रहा है। इस बीच दुर्ग के जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षा विभाग को भेजी रिपोर्ट में साफ कहा है कि जिले के ग्रामीण अंचलों के शासकीय हाई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी तथा शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों की अधिकता के कारण शैक्षिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यही कारण है कि ग्रामीण अंचल के स्कूलों का परीक्षा परिणाम औसत से भी कम है। रिपोर्ट बताती है कि विकासखंड धमधा अंतर्गत शासकीय हाई स्कूल मुरमुदा में स्वीकृत 6 पदों के विरुद्ध मात्र 3 व्याख्याता कार्यरत हैं, जबकि कक्षा दसवीं की छात्र संख्या 63 है। शिक्षक अभाव के कारण यहाँ का वार्षिक परीक्षा परिणाम मात्र 47.62 प्रतिशत रहा। इसी प्रकार शासकीय हाई स्कूल सिलितरा और शासकीय हाई स्कूल बिरेझर में भी स्वीकृत 6-6 पदों के विरुद्ध एक भी व्याख्याता पदस्थ नहीं है। क्रमशः 81 एवं 63 छात्रों की दर्ज संख्या वाले इन विद्यालयों में परीक्षा परिणाम क्रमशः 36.59 प्रतिशत एवं 35.00 प्रतिशत ही रहा है। वहीं दूसरी ओर, शहरी क्षेत्र के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कैंप-1 भिलाई में 225 छात्रों के लिए स्वीकृत 7 पदों के विरुद्ध 17 शिक्षक कार्यरत हैं, जो कि दर्ज संख्या के मान से 10 शिक्षक अधिक हैं। इसी प्रकार नेहरू शासकीय प्राथमिक शाला दुर्ग में 113 छात्रों के लिए स्वीकृत 4 पदों की तुलना में 11 शिक्षक पदस्थ हैं, जो कि 7 शिक्षक अतिरिक्त हैं।
यही हाल राजनांदगांव का भी
इसी तरह जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगांव में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, घोटिया (विकासखंड डोंगरगढ़) में कक्षा 10वीं एवं 12वीं के लिए कुल 103 विद्यार्थियों की दर्ज संख्या है, परंतु स्वीकृत 11 पदों के विरुद्ध मात्र 3 व्याख्याता कार्यरत हैं एवं 8 पद रिक्त हैं। शिक्षकों की इस गंभीर कमी के कारण वर्ष 2024-25 में कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम 27.27 प्रतिशत तथा कक्षा 12वीं का परीक्षा परिणाम 66.66 प्रतिशत रहा। दूसरी ओर, शहरी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक संख्या में शिक्षक पदस्थ हैं। ठाकुर प्यारेलाल शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, राजनांदगांव में 84 विद्यार्थियों की तुलना में 10 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि दर्ज संख्या के अनुसार केवल 4 शिक्षकों की आवश्यकता है। जिला शिक्षा अधिकारी की इस बारे में रिपोर्ट में कहा गया कि यह स्थिति शिक्षकों की असंतुलित पदस्थापना के कारण है।
(लोकदेश न्यूज। रायपुर)


