Tuesday, January 20, 2026
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ये पवित्र खीर चीर देगी आतंकवाद का सीना; कश्मीरी पंडितों के साहस को सलाम 

सैंकड़ों लोगों का जत्था नारे लगाते और भजन गाते हुए जा रहा है. उनके जोश और साहस को देखकर लगता ही नहीं है कि ये दृश्य उस कश्मीर का है, जहां बीती 22 अप्रैल को 26 निरपराध लोगों को सिर्फ इसलिए मार डाला गया था कि वो हिंदू थे. पहलगाम की इस नृशंस आतंकी वारदात के बाद भी कश्मीर में रह रहे पंडितों ने अपने खीर से जुड़े एक पर्व के लिए आतंकवाद की छाती को चीर देने वाले अंदाज में अंगूठा दिखाया है. 

जम्मू से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कश्मीरी पंडितों सहित सैकड़ों लोग खीर भवानी मेले में शामिल होने के लिए रविवार सुबह 60 बसों के काफिले में घाटी के लिए रवाना हुए।

खीर भवानी मेला मंगलवार को गांदरबल के तुलमुल्ला, कुलगाम के मंजगाम और देवसर, अनंतनाग के लोगरीपुरा और कुपवाड़ा के टिक्कर में पांच रागन्या भगवती मंदिरों में आयोजित किया जाएगा।  

पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और उसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य कार्रवाई के कारण इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या कम रही है।  

घाटी और देश के अन्य हिस्सों से कश्मीरी पंडित भारी संख्या में तुलमुल्ला स्थित खीर भवानी मंदिर में एकत्र हुए।  राहत आयुक्त (प्रवासी) अरविंद करवानी ने जम्मू के उपायुक्त सचिन कुमार वैश्य और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर आज सुबह जम्मू के बाहरी इलाके नगरोटा से सड़क परिवहन निगम (आरटीसी) की बसों के काफिले को संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।  

श्रद्धालु मंगलवार को मंदिरों में दर्शन करेंगे और एक दिन बाद जम्मू लौट आएंगे।  

जम्मू के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जोगिंदर सिंह ने कहा कि तीर्थयात्रियों के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।  राहत आयुक्त करवानी ने कहा, ‘‘तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, मार्ग में तथा घाटी में उनके रहने-खाने के संबंध में सभी प्रबंध कर लिए गए हैं।’’  

इस संबंध में बुज़ुर्ग श्रद्धालु श्रुति धर ने कहा, ‘‘ मैं खीर भवानी मेले में जरूर जाती हूं और इस बार भी वहां जाने में मुझे कोई डर नहीं है। हम बचपन से ही ऐसी परिस्थितियां देखते आ रहे हैं। पहलगाम में जो कुछ भी हुआ वह बेहद निंदनीय और बर्बर है।’’

(लोकदेश डेस्क/एजेंसी। जम्मू)