Tuesday, January 20, 2026
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यकीनन आज मीना कुमारी जी की रूह को सुकून मिला होगा; क्योंकि तीस साल बाद हुआ है कुछ

महान फिल्म अभिनेत्री और परदे की ट्रेजेडी क्वीन मीना कुमारी जी की रूह को यकीनन आज बहुत बड़ा सुकून महसूस हुआ होगा। 

महाराष्ट्र में बीते तीस साल से ज्यादा पुराने एक अदालती विवाद का फैसला मीना कुमारी और उनके पति कमाल अमरोही के परिवार के पक्ष में आया है. 

मुंबई की स्थानीय अदालत ने एक हाउसिंग सोसाइटी को आदेश दिया है कि वह कमाल अमरोही और मीना कुमारी से 1966 में पट्टे पर ली गई बांद्रा स्थित जमीन खाली करे।

बांद्रा स्थित लघु वाद न्यायालय की अपीलीय पीठ ने अमरोही के बेटे ताजदार अमरोही के पक्ष में फैसला सुनाया है और 162 सदस्यों वाली सोसाइटी को छह महीने के भीतर पाली हिल इलाके में जमीन का कब्जा सौंपने का आदेश दिया है।

अदालत ने संबंधित आदेश 23 अप्रैल को दिया।  अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश आशीष अयाचित और न्यायाधीश डी आर माली ने कहा कि सोसाइटी अनुबंधित किराये का नियमित रूप से भुगतान करने में विफल रही है, इसलिए यह चूक है।  

आदेश में कहा गया, ‘‘सोसाइटी ने जानबूझकर अनुबंधित किराये के भुगतान के संबंध में पट्टा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया है।’’  

इसमें कहा गया, ‘‘प्रतिवादी सोसाइटी बकाया किराया चुकाने के लिए तैयार नहीं थी और वे बंबई किराया अधिनियम की धारा 12(3) के प्रावधानों का पालन करने में विफल रहे। इसलिए, वादी (अमरोही) बेदखली के आदेश का हकदार है।’’  मीना कुमारी ने 1952 में अमरोही से विवाह किया था और दंपति ने 1959 में उपनगरीय बांद्रा के पाली हिल में 11,000 वर्ग गज से अधिक भूमि खरीदी थी।  

यह भूमि 1966 में भवन निर्माण के लिए कोजीहोम को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड को 8,835 रुपये प्रति माह के किराये पर पट्टे पर दी गई थी।  

वर्ष 1990 में अमरोही ने यह दावा करते हुए पट्टा समझौता समाप्त कर दिया कि सोसाइटी सहमति वाला किराया देने में विफल रही है तथा भुगतान में चूक हुई है।  

इसके एक साल बाद उन्होंने सोसाइटी को बेदखल करने तथा जमीन पर कब्जे की मांग करते हुए मुकदमा दायर किया।  

अक्टूबर 2007 में बांद्रा स्थित लघु न्यायालय ने अमरोही के पक्ष में आदेश पारित किया तथा सोसाइटी के खिलाफ बेदखली का आदेश दिया, जिसे अपीलीय पीठ के समक्ष चुनौती दी गई।  अपीलीय पीठ ने कहा कि बेदखली का निचली अदालत का आदेश ‘‘उचित और सही’’ था।  

सोसाइटी से कहा गया है कि वह छह महीने के भीतर जमीन का कब्जा सौंप दे। 

 अब सोसाइटी इस आदेश को बंबई उच्च न्यायालय में चुनौती देने की योजना बना रही है।

(लोकदेश डेस्क/एजेंसी। मुंबई)