Monday, January 19, 2026
Google search engineGoogle search engine
Homeदेशदिल और दिमाग से बीमार पिता अब बेसहारा नहीं; बेटियां बनीं उनकी...

दिल और दिमाग से बीमार पिता अब बेसहारा नहीं; बेटियां बनीं उनकी अभिभावक 

नागरिक अधिकारों की रक्षा के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बहुत बड़ी व्यवस्था देते  हुए बेटियों को उनके पिता का अभिभावक घोषित किया है. 

बात उन 73 साल के शख्स की है, जिन्हें हार्ट अटैक आया और उसके बाद से उन दिमाग में लगातार जख्म भी पहुंचे हैं. 

अदालत ने माना कि ये बुजुर्ग अब अपनी संपत्ति की देखभाल करने में असमर्थ हो चुके हैं.

न्यायमूर्ति अभय आहूजा की पीठ ने आठ मई के अपने आदेश में कहा कि अदालतें ऐसी स्थितियों में मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकतीं। आदेश की प्रति बुधवार को उपलब्ध कराई गई।  

उच्च न्यायालय ने दोनों बेटियों को उनके पिता का अभिभावक नियुक्त करते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं और खुद की देखभाल करने या अपनी संपत्ति का प्रबंधन करने में असमर्थ हैं।  

आहूजा ने कहा, ‘‘हमारे देश की उच्च अदालतें ‘पैरेंस पैट्रिया’ क्षेत्राधिकार (स्वयं की रक्षा करने में असमर्थ नागरिकों का कानूनी रक्षक) का प्रयोग करती हैं, क्योंकि वे इस अदालत के समक्ष वास्तविक जीवन की स्थिति जैसे मामलों में मूकदर्शक नहीं रह सकतीं।’’  

याचिका के अनुसार 2024 में हृदयाघात के दौरान बुजुर्ग को मस्तिष्क में चोट लगी थी। इसके परिणामस्वरूप, वह अर्ध-चेतन और अक्षम अवस्था में हैं तथा आज तक बिस्तर पर ही हैं।

इसमें उच्च न्यायालय से दोनों बेटियों को उनके पिता का अभिभावक नियुक्त करने का आग्रह किया गया था।

(लोकदेश डेस्क/एजेंसी। मुंबई)