तिरूवंतनतपुरम से कांग्रेस के सांसद शशि थरूर को लेकर उनकी ही पार्टी बेहद गुस्से में है. इसकी वजह यह कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की सरकार ने सात सदस्यों का एक डेलिगेशन बनाया है. ये सदस्य ऑपरेशन सिंदूर को लेकर यूनाइटेड नेशंस की सिक्योरिटी काउंसिल के मेंबर देशों को जानकारी देंगे।
इस समिति में कांग्रेस से शशि थरूर को रखा गया है. इसके साथ ही नया सियासी विवाद भी उठ खड़ा हुआ है.
कांग्रेस का कहना है कि केंद्र सरकार उसके साथ खेल कर रही है. क्योंकि उसने प्रतिनिधिमंडल के लिए अपनी तरफ से जो नाम सुझाए थे, उनमें थरूर का नाम शामिल नहीं था.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि ‘प्रतिनिधिमंडल ने हमने सिर्फ चार नाम दिए.’
रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘शुक्रवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बात की। रिजिजू ने प्रतिनिधिमंडल के लिए पार्टी से चार सांसदों के नाम मांग थे। कुछ घंटों बाद राहुल गांधी ने रिजिजू को चार नाम भेजे जिनमें आनंद शर्मा, गौरव गोगोई, सैयद नासिर हुसैन और राजा बरार शामिल थे लेकिन थरूर का नाम नहीं था।’
कांग्रेस की चिंता इसलिए भी है कि थरूर ने बीते कुछ दिनों में नरेंद्र मोदी सरकार की खुलकर तारीफ़ करने में भी कोई संकोच नहीं किया है. उन्होंने ऑपरेशन सिन्दूर के लिए भी सरकार की पीठ थपथपाई थी, जबकि कांग्रेस इस ऑपरेशन की सफलता का श्रेय सेना को देने तक ही सीमित दिखी।
रमेश ने कहा कि सरकार इस मामले में शरारतपूर्ण मानसिकता के साथ काम कर रही है.
हम बता दें कि सरकार ने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करने के लिए जिन नेताओं का चयन किया है, उनमें सत्तारूढ़ दलों से भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद व बैजयंत पांडा, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे और जनता दल (यूनाइटेड) के नेता संजय झा, विपक्षी दलों में कांग्रेस के शशि थरूर, द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) की कनिमोई, राकांपा-एसपी की सुप्रिया सुले शामिल हैं।
(लोकदेश डेस्क/एजेंसी। नई दिल्ली)


