Sunday, January 18, 2026
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आज भी ऐसी है जादुई तलब तलत महमूद के गीतों की

‘ये हवा ये रात ये चांदनी’ ‘फिर वही शाम, वही गम, वही तन्हाई है’ ‘जाएं तो जाएं कहां’ और ‘रात ने क्या-क्या ख्वाब दिखाए’ जिसे अमर गीतों को सुर प्रदान करने वाले गायक तलत महमूद की आज नौ मई को पुण्यतिथि है. साल 1998 में उन्होंने आज ही के दिन इस नश्वर संसार को अलविदा कह दिया था. 

पुण्यतिथि पर तलत साहब के बारे में और भी जानते हैं

तलत महमूद के साथ एक दिलचस्प तथ्य जुड़ा है की वह पहले ऐसे भारतीय गायक हैं जिनका विदेशों में भी कॉन्सर्ट हुआ था। वर्ष 1956 में ईस्ट अफ्रीका दौरे से शुरू हुआ यह सिलसिला अमेरिका, ब्रिटेन, वेस्टइंडीज जैसे मुल्कों तक फैला। तलत 1991 तक कॉन्सर्ट में गाते रहे।

नवाबों के शहर लखनऊ में 24 फरवरी 1924 को जन्में तलत महमूद को बचपन से ही गाने का बड़ा शौक था, लेकिन इनके परिवार को उनका गाना बजाना बिल्कुल पसंद नही था। उनकी ज़िन्दगी में एक वक्त ऐसा भी आया जब इन्हें परिवार या फ़िल्मों में से किसी एक को चुनना था। इन्होंने गाने को चुना, जिस वजह से यह 10 सालों तक अपने परिवार से दूर रहे। बाद में जब वह एक मशहूर गायक बन गए तब इनके परिवार वालों ने उन्हें अपना लिया।
तलत महमूद ने संगीत की पढ़ाई लखनऊ के भातखंडे संगीत महाविद्यालय में की थी जिसे पहले मैरिस कॉलेज कहा जाता था। तलत वहां की प्रवेश परीक्षा की लिखित परीक्षा में कुछ ख़ास नहीं कर पाए, लेकिन जब उनकी स्वर परीक्षा हुई, तो परीक्षक उनका आलाप सुन कर आश्चर्यचकित रह गए और बिना कोई सवाल पूछे तलत महमूद का दाख़िला कर लिया गया। 

तलत महमूद ने 1939 में अपना गायन करियर शुरू किया। वह लखनऊ के ऑल इंडिया रेडियो में दाग़ देहलवी, जिगर मुरादाबादी और मीर तक़ी मीर की ग़ज़लें गाया करते थे। बहुत जल्द ही इनकी प्रतिभा को रिकॉर्ड कंपनी एच.एम.वी. ने परख लिया और 1941 में उसने उनकी आवाज़ में एक नॉन फ़िल्मी एलबम रिलीज़ किया। यह एलबम काफ़ी हिट हुआ ।
तलत महमूद ने इसके बाद कलकत्ता का रुख किया। वहां उन्होंने कई बांग्ला फ़िल्मों में तपन कुमार के नाम से गाने गाए। 

तलत महमूद दिखने में भी अच्छे लगते थे, इसलिए उन्हें वहां की फ़िल्मों में बतौर अभिनेता काम करने का भी मौका मिला। इसके बाद तलत महमूद ने बॉम्बे का रुख किया।

बॉम्बे में अपनी गायकी के लिए उन्हें काफ़ी संघर्ष करना पड़ा। इस दौरान संगीतकार अनिल बिस्वास की नज़र तलत महमूद पर पड़ी और अपनी आवाज़ की जिस कंपन और लरजिश की वजह से इन्हें बार-बार रिजेक्ट किया जा रहा था, संगीतकार अनिल बिस्वास इनके इसी अंदाज पर फिदा हो गए।

तलत महमूद ने फिल्म आरजू के लिये अनिल बिस्वास द्वारा रचित गीत ‘ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल’ से मिला के लिये पार्श्वगायन किया। फ़िल्म में यह गाना दिलीप कुमार के ऊपर फ़िल्माया गया था। गाना काफ़ी हिट भी हुआ। यहीं से उनका हिंदी फ़िल्मों में प्लेबैक सिंगिंग का शानदार सफ़र शुरू हो गया।

तलत की गीतों में उनके स्वर का भी ऐसा माधुर्य था कि उन्हें लगातार सुनने  की तलब से  उनके प्रशंसक खुद भी कभी मुक्त होना नहीं चाहेंगे।