Sunday, January 18, 2026
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भूख से माता-पिता की मौत देख  बचपन से आधा पेट खाना ही खाया 128 साल के स्वामी शिवानंद ने 

स्वामी शिवानंद  नहीं रहे. पद्मश्री से सम्मानित वाराणसी निवासी प्रख्यात योग गुरु ने 128 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। 

अस्वस्थ होने के कारण उन्हें 30 अप्रैल को काशी हिंदू विश्वविद्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया था और शनिवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली।  

वर्तमान में बांग्लादेश के श्रीहट्ट जिले में आठ अगस्त 1896 को शिवानंद का जन्म हुआ था

शिवानंद के योग की दुनिया में जाने से पहले  बहुत बचपन में ही उन्होंने हठयोग वाले अंदाज में ऐसा संकल्प निभाया कि सभी चकित रह गए. 

दरअसल, बाबा शिवानंद जब छह साल के थे तभी उनके माता-पिता की भूख के कारण मृत्यु हो गई थी। तब से वह उस नन्हीं उम्र में लिए गए संकल्प के अनुसार आधा पेट ही भोजन करते थे। 

बाबा की दिनचर्या और खानपान ही उनकी उम्र का राज था। वह नियमित रूप से तड़के तीन बजे उठ जाते थे और योग करते थे। वह अपना सारा काम खुद करते थे। 

वह केवल उबला हुआ भोजन करते थे और चटाई पर सोते थे।

शिवानंद बाबा के माता-पिता के मौत के बाद उनकी जिम्मेदारी ओंकारानंद ने अपने ऊपर ले ली। इन्हीं के पास रह कर शिवानंद बाबा ने ज्ञान और शिक्षा ग्रहण की।  

बाबा शिवानंद को 2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग गुरु के निधन पर शोक प्रकट करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘योग साधक और काशी निवासी शिवानंद बाबा जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। योग और साधना को समर्पित उनका जीवन देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। योग के जरिए समाज की सेवा के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित भी किया गया था।’’  

मोदी ने कहा, ‘‘शिवानंद बाबा का शिवलोक प्रयाण हम सब काशीवासियों और उनसे प्रेरणा लेने वाले करोड़ों लोगों के लिए अपूरणीय क्षति है। मैं इस दुःख की घड़ी में उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं।’’ 

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘योग के क्षेत्र में अप्रतिम योगदान देने वाले काशी के प्रख्यात योग गुरु ‘पद्मश्री’ स्वामी शिवानंद जी का निधन अत्यंत दुःखद है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!’’  

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘आपकी साधना एवं योगमय जीवन संपूर्ण समाज के लिए महान प्रेरणा है। आपने अपना पूरा जीवन योग के विस्तार में समर्पित कर दिया। बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को सद्गति एवं उनके शोकाकुल अनुयायियों को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।’’

(लोकदेश डेस्क/एजेंसी। वाराणसी)