भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए इंतज़ार की घड़ियाँ ख़त्म हुई हैं. तिब्बत में स्थित कैलाश मानसरोवर की यात्रा छह वर्ष के बाद फिर से शुरू होने जा रही है और विदेश मंत्रालय ने इसके लिए पंजीकरण शुरू कर दिया है
विदेश मंत्रालय ने आज यहां बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा जून से अगस्त के दौरान आयोजित की जाएगी
इस वर्ष 50-50 यात्रियों के कुल 15 बैच जाएंगे जिनमें से पांच बैच, उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे के रास्ते से और 10 बैच सिक्किम में नाथू ला दर्रे के रास्ते से जाएगी
लिपुलेख दर्रे से होकर जाने पर 22 दिन और नाथू ला दर्रे से होकर 21 दिन का समय लगेगा
कोविड-19 महामारी के कारण 2020 से यह यात्रा रुक गई थी.
30 जून 2025 से यह यात्रा फिर शुरू होगी. यात्रा का पहला दल 10 जुलाई को लिपुलेख दर्रे से चीन में प्रवेश करेगा, और अंतिम जत्था 22 अगस्त को चीन से वापस भारत लौटेगा.
यात्रा के दौरान तीर्थयात्री कई प्रमुख स्थलों पर रुकेंगे. ये जगहें हैं – टनकपुर (चंपावत जिले), धारचूला (पिथौरागढ़), गुंजी और नाभीडांग. कैलाश दर्शन के बाद यात्री चीन से वापसी करते हुए पिथौरागढ़ जिले के बूंदी, चौकोरी और अल्मोड़ा में रुकेंगे, और फिर दिल्ली लौटेंगे. पूरे यात्रा का समय 22 दिन का होगा.
हिन्दू धर्म के अनुसार, कैलाश पर्वत भगवान शिव का घर है और यह स्थान विशेष रूप से मोक्ष की प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है. यहाँ की परिक्रमा करने से आत्मा को शांति मिलती है और जीवन के सारे पापों का नाश होता है.
(लोकदेश डेस्क/एजेंसी। नई दिल्ली)


