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19 को कोलकाता में होने वाली ममता की रैली में शामिल नहीं होंगे केसीआर

19 को कोलकाता में होने वाली ममता की रैली में शामिल नहीं होंगे केसीआर

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को मात देने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विपक्षी दलों को एकमंच पर लाने के लिए 19 जनवरी को कोलकाता में रैली करने जा रही हैं। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) प्रमुख चंद्रबाबू नायडू तक के शामिल होने की संभावना है। इस कार्यक्रम में कांग्रेस के शामिल होने की वजह से चलते तेलंगाना के मुख्यमंत्री और टीआरएस अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव मंच साझा नहीं करेंगे। दरअसल तेलंगाना के सीएम केसीआर गैर कांग्रेस-गैर भाजपा दलों के साथ फेडरल फ्रंट (संघीय मोर्चा) बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने पश्चिम बंगाल जाकर ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। ऐसे में अब ममता विपक्षी दलों को एकजुट कर भाजपा को अपनी ताकत का एहसास करना चाहती हैं, तो केसीआर उसमें शामिल नहीं हो रहे हैं। इसे ममता के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।केसीआर के शामिल न होने के पीछे उनके अपने राजनीतिक समीकरण हैं। ममता के मंच पर कांग्रेस और टीडीपी ऐसे दो दल हैं, जिनके साथ केसीआर के 36 के संबंध हैं। तेलंगाना में टीआरएस के खिलाफ कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल हैं। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस टीडीपी के साथ मिलकर केसीआर के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरी थी, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली थी। टीआरएस 119 सदस्यीय तेलंगाना विधानसभा की 88 सीटें जीतकर पिछले महीने फिर से सत्ता में आई और कांग्रेस 19 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही। ऐसे में केसीआर किसी भी सूरत में अपने आपको कांग्रेस से अलग दिखाना चाहते हैं। यही ममता की रैली में शामिल न होने की मुख्य वजह मानी जा रही है। दूसरी ओर, ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने एक निजी कार्यक्रम में कहा उनकी पार्टी की नीति साफ है, वह भाजपा और कांग्रेस दोनो से समान दूरी बनाकर चल रहे हैं।
पटनायक के बयान से साफ है कि वह इन दोनों गठबंधनों से अलग अपनी सियासी राह तय करेंगे। हालांकि ममता बनर्जी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन करके उतरेंगी या नहीं। यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। इसके बावजूद ममता की रैली में कांग्रेस के शामिल होने की संभावना मानी जा रही है। बंगाल की प्रदेश कांग्रेस कमेटी ममता को लेकर सख्त तेवर अख्तियार किए हुए हैं। ममता बनर्जी की यह रैली तमाम विपक्षी पार्टियों को आकर्षित कर रही है, तो केंद्र की सत्ता पर काबिज भाजपा को भी अपनी तरफ खींच रही है। भाजपा को देखना है कि ममता की यह रैली विपक्ष को साध पाती है या नहीं। पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से टीएमसी के पास 34 सीटें हैं, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बार सभी 42 सीटों पर जीत हासिल करने की कोशिशों में लगी हैं। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 23 सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा है।

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