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करोड़ों खर्च फिर भी संभाग में एक लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित

करोड़ों खर्च फिर भी संभाग में एक लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित

कुपोषण को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे दांवों की नीति आयोग द्वारा जारी ताजा स्वास्थ्य रैंकिंग की रिपोर्ट पोल खुल गई
है। 23 पैमानों पर जारी रैंकिंग में 2015-16 और 2017-18 के बीच बदलावों को बताया गया है। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी बच्चों, माताओं को योजनाओं का लाभ मिलता नहीं दिखाई दे रहा। संभाग में कुल 9706 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। यहां दर्ज हजारों बच्चों को पोषण आहार का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा। महिला एवं बाल विकास द्वारा जारी अप्रैल 2019 की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रों में 3 से 6 माह के 4 लाख 19 हजार 288 बच्चे दर्ज हैं। लाभार्थी बच्चे 4 लाख 4 हजार 374 हैं। 3 वर्ष से 6 वर्ष के दर्ज बच्चों की संख्या 4,72,155 है और इनमें लाभार्थी 3,97,693 हैं।

आंगनबाड़ी केंद्रों के अनुसार एक लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित
सागर संभाग के आंगनबाड़ी केंद्रों पर कुल 8,12,153 बच्चे दर्ज हैं। इनमें से 1,18,512 बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं। अतिकम वजन वाले बच्चों की संख्या 13,842 है। कुपोषित बच्चों की यह संख्या अपेक्षा के अनुसार कम नहीं हो रही आंगनबाड़ी सेंटर पर गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार समय पर नहीं मिलता, फिर जब बच्चे कुपोषित होते हैं तो उन पर ध्यान नहीं दिया जाता। कुपोषित बच्चों को सही समय पर एनआरसी सेंटर में भी भर्ती नहीं कराया जाता।

जागरूकता का अभाव
सागर जिले में 2633 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। कुपोषण के मामले में संभाग में यह सबसे आगे है। जिले में 30 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण से ग्रसित हैं। जिला स्तर पर एक एनआरसी और क्षेत्र में 9 सेंटर संचालित हैं। जिला अस्पताल के सेंटर पर 20 बच्चों को भर्ती करने की जगह है, लेकिन वर्तमान में 36 बच्चे भर्ती हैं। बाल रोग विशेषज्ञ मधु जैन के अनुसार सालभर में 480 भर्ती होने चाहिए, लेकिन इससे डेढ़ गुना ज्यादा भर्ती हो रहे हैं। करीब 700 बच्चे पिछले साल भर्ती हुए थे।